कोरिया: स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के नतीजे घोषित होने के बाद नगर पालिक निगम चिरमिरी के द्वारा आभार रैली निकाली गई। (वेदप्रकाश तिवारी की रिपोर्ट)

कोरिया:  स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के नतीजे घोषित होने के बाद नगर पालिक निगम चिरमिरी के द्वारा आभार रैली निकाली गई। निगम इसे उपलब्धि बता रहा हैं। लेकिन बता दें क स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 में प्रदेश में दूसरा स्थान अर्जित करने वाले चिरमिरी को नेशनल लेवल पर स्वच्छता रैकिंग में निगम को 134वें स्थान मिला है।
छग को देश में स्वच्छता रैकिंग में तीसरा स्थान मिलने निगम कार्यालय से आभार रैली निकाली गई। जिसमें महापौर के.डोमरु रेड्डी, आयुक्त खजांची कुम्हार, स्वच्छता विभाग के उमेश तिवारी, दिनेश नायक सहित अन्य जनप्रतिनिधि व कर्मचारी शामिल हुए।

गौरतलब यह है कि स्वच्छता विभाग की लापरवाही व योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होने के कारण सफाई सर्वेक्षण 2018 में शहर पिछड़ गया। यहां केंद्र सरकार की तरफ से समय-समय पर लाई गई योजनाओं में करोड़ों रुपये खर्च हो गया, लेकिन नगर निगम और प्रशासन शहर को स्वच्छ नहीं कर सका। केंद्र सरकार के स्वच्छता मिशन के तहत कराए गए सफाई सर्वेक्षण 2017 में शहर को 4000 में 2318 अंक ही हासिल हो सके। शहर को हरा भरा व स्वच्छ बनाने का जिम्मा उठाने वाला नगर निगम प्रशासन इसके लिए गंभीर नजर नहीं आया। लंबे समय से न तो शहर में कूड़े का निस्तारण सही ढंग से हो पा रहा है और न ही प्रतिदिन घरों से डोर टू डोर कूड़ा उठाया जा रहा है। नियमानुसार सुबह और शाम होने वाली सफाई एक समय भी सही से नहीं हो पा रही है। शहर के नाले नालियां चैक हैं। प्री-मानसून के पहले नाले नालियों की होने वाली सफाई भी नहीं कराई गई। तमाम अनियमितताओं के चलते ही शहर कूड़े के ढेर में तब्दील हो रहा है।
नेताप्रतिपक्ष अयाजुद्दीन सिद्धिकी का कहना है कि महापौर की इच्छाशक्ति से चिरमिरी पीछे हो गया है ।
राज्य सरकार के द्वारा पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद निगम स्वच्छता में पिछड़ गया। कारण है कि इसकी माॅनिटरिंग नही की गई। चिरमिरी की 50 प्रतिषत सफाई तो बारिश में कुदरत ही कर देती है। शेष सफाई का भी पूरा नहीं होना निगम की नाकामी है। – नेताप्रतिपक्ष,
नगर निगम चिरमिरी
इस हालत के लिए ये है कार
– शहर के सभी घरों से डोर टू डोर कूड़ा नहीं उठाया जाना।
– शहर की नियमानुसार दो समय सुबह और शाम सफाई नहीं होना।
– गीले व सूखे कूड़े अलग-अलग डस्टबिन मुहैया होने के बाद भी एक ही गाड़ी में संकलन कराया जाना।
– कूड़ा निस्तारण प्लांट चालू नहीं होना।
– सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगना
– शहर में टायलेट सिस्टम दुरुस्त नहीं होना।
– स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक नहीं करना।
– कूड़ा गाड़ियों में जीपीआरएस न होना।

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