जरीफनगर: झोपड़ी मे बेबा जीवन यापन को मजबूर । पात्र होने के बावजूद भी ग्राम प्रधान ने नही बनबाये आवास । (सोमवाीरसिहॅ यादव की रिपोर्ट)

बदायूँ/जरीफनगर: योगी सरकार भले ही गरीबो मजदूरो के हित के लिए योजनाऐ बनाकर भेजती है । पर गरीब मजदूर तक आने मे बडे बडे बिचौलिये बन्दर बाट करने मे लगे हुए है ।

ऐसा ही एक नजारा विकास खंड दहगवाॅ क्षेत्र के गाँव ढेल मे देखने को मिला । दो परिवारो मे अलग अलग दो बेबा महिलाये अपने छोटे छोटे बच्चो के साथ टुटी झोपड़ी मे जीवन यापन करने को मजबूर है ।
विकास खंड दहगवाॅ क्षेत्र के गाँव ढेल का पप्पू पुत्र बुद्धसैन पांच वर्ष पूर्व मे कुरूक्षेत्र मे एक भट्टा पर अपने परिवार के साथ मजदूरी करने चला गया था । काम करते समय भट्टा की गर्म दीवार पप्पू के ऊपर गिर गई । जिससे पप्पू गम्भीर घायल हो गया । परिजन पप्पू को लेकर अपने पैतृक गांव ढेल वापस लौट आये । बेहद गरीब होने के कारण ईलाज के लिए पप्पू ने अपनी दो बीघा जमीन बेच दी और काफी लम्बे समय तक ईलाज चलता रहा । जब पैसा खत्म हो गया औरअब जमीन भी नही रही बेचने के लिए तो परिजनो के आगे बेहद मजबूरी आ गयी खाने को लाले पडने लगे । और ईलाज न होने के कारण पप्पू की मौत हो गई । पत्नी और दो छोटे छोटे बच्चे बे सहारा हो गये । ऐसे मे क्षेत्रीयप्रतिनिधि न जिला पंचायत सदस्य और ग्राम प्रधान ने भी कोई सहायता नही की । पप्पू की मृत्यु होने के बाद पप्पू की बेबा पत्नी सुनीता अपने छोटे छोटे दोनो बच्चो के साथ टूटी झोपड़ी मे जिंदगी गुजार रही है । तेज बारिश होने पर झोपडी मे बैठने को भी जगह नही बचती ।
दूसरी ओर 65 वर्षीय बेबा चमेली पत्नी स्वर्गीय पानसिहॅ बेहद दुख के साथ अपने नाती नातिन के साथ झोपडी मे जीवन यापन कर रही है । दोनो बेबा आवास की पात्र होने के बावजूद भी ग्राम प्रधान ने ध्यान नही दिया ।

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