बदायूँ: तुलसी साहित्यिक एवं समाजिक संस्था द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस से पूर्व पर्यावरण प्रदूषण विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया ।

बदायूँ: तुलसी साहित्यिक एवं समाजिक संस्था द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस से पूर्व पर्यावरण प्रदूषण विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन तुलसी कार्यालय पर सम्पन्न हुयी मुख्य अतिथि भाजपा महिला प्रकोष्ठ की पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा शारदा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि
मानव के धरती पर आने के पहिले पर्यावरण ने अपनी सहज, सुंदर उपस्थिति दर्ज करवाई थी। धीरे-धीरे मानव विकास करता गया एवं पर्यावरण को विनाश की तरफ़ ले जाता गया।
तुलसी संस्था की जिला उपाध्यक्ष सीमा चौहान ने कहा कि धरती के वस्त्रों के रूप में प्रसिद्ध जंगल काट डाले गए, जीवन-दायनी नदियाँ कचरे के रूप में परिवर्तित कर दी गईं, हरे-भरे बाग़-बगीचे रेगिस्तान बना दिए गए। हरियाली को मिटा कर आदमी ने ख़ुद अपने लिए संकट पैदा किया है। आज मानसून, बारिश को तरसता आदमी, सूखे की समस्या, खाद्य संकट से जूझता आदमी ख़ुद ही अपनी हालत का जिम्मेवार है।
विशिष्ट अतिथि प्रतिभा चंदेल ने कहा कि एक तरफ़ जहाँ आदमी ने हरियाली को मिटाया है वहीं दूसरी तरफ़ उसने अपने ऐसो-आराम के समान जुटा कर पर्यावरण संकट को ही बढाया है। सुख-सुविधाओं के इन उपकरणों के कारण आज सारा विश्व ग्लोबल वार्मिंग के दौर से गुजर रहा है । पूरे विश्व-ब्रह्माण्ड का तापमान विगत वर्षों में बढ़ गया है ।
तुलसी संस्था सचिव पवन शंखधार ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए हमें अधिक से अधिक हरे व फलदार पौधों का रोपण करना होगा। ताकि यह आने वाले दिनों में वृक्ष के रूप में हमें अधिक आक्सीजन दें ताकि वातावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
तुलसी संस्था ने निर्णय लिया है कि इस बार संस्था पाँच सौ फलदार बृक्ष लगायेगी क्योंकि आज पर्यावरणीय गिरावट और जलवायु परिवर्तन ने संपूर्ण मानव जाति को प्रभावित किया है। इस समस्या को दूर करने के लिए पूरी दुनिया को एक होना चाहिए। मानव अपने अस्तित्व के लिए प्राकृतिक वातावरण पर निर्भर हैं, को पर्यावरणीय चिंताओं से निपटने के लिए वृक्ष लगाना अनिवार्य है
विचार गोष्ठी का संचालन कवि षट्वदन शंखधार ने किया

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