बदायूँ: पराली जलाई तो किसी हाल में बख्शे नहीं जाओगे

बदायूँ: जिलाधिकारी कुमार प्रशान्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा, उप निदेशक कृषि रामवीर कटारा एवं उपायुक्त उद्योग जैस्मिन ने प्रमोशन आफ एग्रीकल्चर फाॅर इन सीटू वर्ष 2020-2021 योजना के अन्तर्गत विकासखण्ड उझानी में आजाद कृषक बहुउद्देशीय सहकारी समिति ग्राम शेखूपुर में फसल अवशेष प्रबन्धन हेतु स्थापित कराये गये फार्म मशीनरी बैंक के अन्तर्गत क्रय किये गये कृषि यन्त्रों का निरीक्षण किया। समिति को रू0-15 लाख के कृषि यन्त्र (हाइड्रोलिक रिवर्सबुल एम0बी0 प्लाऊ, मल्चर, लेजर लैण्ड लेबलर, टैक्टर, हैप्पी सीडर, रोटावेटर) क्रय करने पर कृषि विभाग द्वारा 80 प्रतिशत रू0-12 लाख का अनुदान अनुमन्य कराया गया है। उपरोक्त यन्त्रों से फसल अवशेषों को मिटटी में मिलाया जा सकता है। जनपद के अन्य कृषक उपरोक्त समिति से किराये पर यन्त्र प्राप्त कर सकते हैं एवं फसल अवशेषों को मिटटी में मिला सकते हैं। फसल अवशेषों में आग लगाने पर शासन द्वारा सैटेलाइट के माध्यम से निगरानी की जा रही है। फसल अवशेषों में आग लगाने की घटना की पुष्टि होने पर सम्बन्धित कृषक एवं सम्बन्धित ग्राम प्रधान के विरूद्व एफ0आई0आर0 दर्ज कराकर जुर्माना भी लगाये जाने का प्रावधान है।
गुरुवार को डीएम ने कहा कि यह धान एवं गन्ना कटाई का सीजन आ गया है। खली की पत्तियों की कटाई का कार्य चलता रहता है। बदायूँ जनपद में धान और गन्ना काफी मात्रा में होता है। यह देखा गया है कि कटाई के बाद इसके अवशेषों को जला दिया जाता है। यह खेत के लिए बहुत हानिकारक है, इससे खेत की उबर्रक शक्ति धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है, भूमि बंजर बन जाती है। इसके अलावा इसके धुएं से वायु प्रदूषण भी होता है। दिल्ली आदि जैसे महानगरों में इस धुए के कारण वातावरण दूषित हो रहा है। इससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और दमा की बीमारियाँ होने लगी हैं। इसको दृष्टिगत रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए है कि कहीं भी पराली नहीं जलाई जाएगी। यदि कोई जलाता है तो उसके विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाए। इसकी निगरानी से सैटेलाइट से माॅनीट्रिंग की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने पर छोटी न्यायालयों में राहत नहीं मिल सकेगी, फिर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही होना तय है। इस गलत फहमी में न रहें कि आपने पराली जला ली है और किसी ने आपको नहीं देखा है। पराली जलाने की घटनाओं पर सैटेलाइट से निगरानी की जा रही है। इसमें 6 महीने तक की कारावास एवं 10 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए पराली आदि को खेतों में न जलाएं, अवशेषों को गौवंशों आदि को खिलाने हेतु हरा चारा और यह मिलाकर प्रयोग किया जा सकता है। अधिक अवशेषों के होने पर प्रधान मनरेगा के तहत 6 वाई 6 फिट का गढडा खुदवा दें, उसमें इसको डलवाकर आवश्यकतानुसार कैमिकल डलवाकर ऊपर से मिट्टी डलवा दें। तीन-चार महीने के बाद वह खाद में परिवर्तित हो जाएगा। इसका ऐसे भी प्रयोग कर सकते हैं। पराली न जलाएं अन्यथा कार्यवाही हो जाएगी।
एसएसपी ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण होने लगती है, जिससे वातावरण दूषित होने लगता है और सांस सम्बंधी समस्याएं होने लगती है। पराली जलाने वालों को किसी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। जुर्माने के साथ ही मुकदमा भी दोषी के विरुद्ध लिखा जाएगा। सैटेलाइट से इसकी माॅनिट्रिंग शुरू हो चुकी है। छोटी से छोटी पराली जलाने पर भी डिटेक्ट कर लिया जाएगा और ऐसा करने वालों पर कठोरतम कार्यवाही भी की जाएगी। खेतों से निकलने वाले अवशेषों को अपने गौवंशों को चारे के रूप में दे या गौशालाओं को भी दान में दे सकते हैं। उम्मीद है सभी ग्रामवासी सरकार के आदेशों का अनुपालन करें और वातावरण को कतई दूषित न होने दें।

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