बदायूँ: बच्चे नए भारत की तस्वीर : डीएम

बदायूँः  विद्यालय में आने वाले बच्चों को जबरदस्ती गोद में उठाकर विद्यालय लाया जाए। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ संस्कारी शिक्षा भी दें। दो एबीआरसी, एक अध्यापक एवं एक कम्प्यूटर ऑपरेटर विद्यालय में अनुपस्थित पाए जाने पर वेतन काटने के निर्देश दिए। विद्यालय का प्रांगण साफ सुथरा किया जाएं।
गुरुवार को  जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं प्राथमिक विद्यालय जरीफनगर का औचक निरीक्षण किया। विद्यालय में सहायक अध्यापक सुरेंद्र पाल सिंह, अनुदेशक इकराम अली तथा एबीआरसी धर्मेंद्र, मुकेश एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर शशिकांत अनुपस्थित मिले। डीएम ने सभी अनुपस्थित अध्यापक एवं कंप्यूटर ऑपरेटर के वेतन काटने के निर्देश दिए है। जिलाधिकारी ने विद्यालय में बच्चों से गिनती, पहाड़े एवं प्रश्न पूछें। उन्होंने बच्चों से कहा कि जिनके माता-पिता पढ़े नहीं है उनको पढ़ाने का कार्य करें। एक महीने बाद बच्चों के माता-पिता की परीक्षा लेंगे। जब तक सभी बच्चे अपने माता पिता को पढ़ना लिखना अवश्य सिखा दें। विद्यालय में सभी बच्चे ड्रेस पहनकर तथा साफ-सुथरे होकर पढ़ने आए। प्रधानाचार्य चंद्रकेश यादव को निर्देश दिए कि विद्यालय के प्रांगण को साफ सुथरा कराएं। उन्होंने कहा कि विद्यालय न आने वाले बच्चों को जबरदस्ती गोद में उठाकर लाया जाए। कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन्हीं शिक्षित बच्चों का 10 साल बाद समाज में एक नया परिवर्तन देखते हुए नजर आएगा। तत्पश्चात आंगनबाड़ी केंद्र में चल रही महिला स्वयं सहायता समूह की बैठक में महिलाओं से समूह के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने महिलाओं से कहा कि अच्छा कार्य करें जिससे उनकी आय में वृद्धि हो और स्वयं आत्मनिर्भर हो सके। डीएम ने कहा कि सरकार चाहती है कि महिलाएं स्वयं सहायता के माध्यम से आगे बढ़े। उन्होंने महिलाओं से पूछा कि समूह का पैसा निकाल कर क्या करती हो तो किसी ने बताया कि गाय तथा भैंस खरीद कर दुग्ध उत्पादन कर अपनी आय बढ़ाई है एक महिला ने बताया कि समूह से पैसा निकालकर सब्जी बेचने का कार्य करते हैं। जिलाधिकारी ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि सभी महिलाएं समूह का पैसा निकाल कर उस पैसे को ऐसी जगह लगाएं जहां उनकी आय में  वृद्धि हो सके और समय से समूह का पैसा जमा करें। उन्होंने कहा कि महिलाएं सिलाई का कार्य सीख लें जिससे आने वाले समय में विद्यालय के बच्चों की ड्रेस उन्हीं से सिलाई जा सके। इससे महिलाओं को अच्छी आमदनी होगी।

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