बदायूँ: बाढ़ के हालात से निपटने के लिए कर लें सभी तैयारियां: डीएम

बदायूँ: जनपद में 10 जून 2010 को सबसे बड़ी बाढ़ आई थी, इसमें जान-माल का खासा नुकसान हुआ था। जहां एक ओर मौसम विभाग की ओर से इस साल ज्यादा बारिश की संभावनाएं जताई जा रही हैं तो वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन भी बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए मुश्तैद नज़र आ रहा है। डीएम ने 2010 से 2017 तक आई बाढ़ में कितने गांव प्रभावित हुए तथा इनमें कितने परिवारों का नुकसान हुआ इसकी सूची बाढ़ खण्ड के अधिकारियों से मांगी है।
शनिवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभाकक्ष में जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने बाढ़, शौचालय, आवास, वृक्षारोपण, शिक्षा सम्बंधित बिन्दुओं पर ग्राम प्रधानों व सचिवों की बैठक की। डीएम ने कहा कि बाढ़ का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाए। लेखपालों के माध्यम से गांवों में बाढ़ की सूचना उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे समय रहते ग्रामीण सावधानियां बरत सकें। अलर्ट जारी होने पर ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे। बिजली के खंभे व तारों से विशेष सावधानियां बरते।  लेखपाल सुनिश्चित करें कि कहां-कहां बाढ़ चैकियां बनाई जाएंगी और कौन-कौन वहां तैनात किया जाएगा। उपजिलाधिकारी भी तैयारियां कर संवेदनशील गांवों में बैठक आयोजित करें। मोटरबोट कितनी है तथा किस गांव में बाढ़ की क्या स्थिति रहती है, यह भी सुनिश्चत कर लें। लेकिन उससे पहले चूंकि अभी गर्मी का मौसम चल रहा है, समस्त उपजिलाधिकारी तालाबों में पानी भरवाना सुनिचत करें, ताकि कोई भी पशु-पक्षी प्यास की किल्लत से न मरे। उन्होंने अपर जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि बाढ़ पीड़ित ग्रामों में राशन की व्यवस्थाएं कराना सुनिश्चित करें। डीएम ने कहा कि टीम बनाकर निरीक्षण किया जाए गंगा किनारे बसे गांवों में शौचालय प्रयोग किया जा रहा है अथवा नहीं। किसी गरीब व्यक्ति का शौचालय यदि बनने से रह गया है तो उसका शौचालय मनरेगा से बनवाया जाए। प्रधानांे की जिम्मेदारी है कि अपने गांव का वातावरण स्वच्छ रखने के लिए ग्रामीणों से शौचालय का ही प्रयोग करने के लिए प्रेरित करें। जिन लोगों ने अभी तक शौचालयों का निर्माण नहीं कराया है ग्राम सचिव ऐसे लोगांे के साथ बैठक कर उन्हें शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करें। जिन ग्राम प्रधानों के गांवों में शत प्रतिशत शौचालय निर्माण हो चुका है, डीएम ने उनके लिए तालियां बजवाकर उनका सम्मान किया। उन्होंने कहा कि शौचालय बनाकर उसे साफ रखना भी अहम जिम्मेदारी है, इसे हमेशा साफ रखें। जिन सचिवों ने फोटो अपलोड नहीं किए हैं वह तुरंत अपलोड करें। कार्य में लापरवाही पाए जाने पर डीएम ने सचिव मुनीश कुमार सक्सेना एवं राम बहादुर सक्सेना के वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप गंगा हरितमा अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का सपना है कि गंगा किनारे पेड़ लगाए जाएं तथा गांवों का समग्र विकास किया जाए। डीएम ने कहा कि कृृषक अपनी भूमि पर पेड़ लगाएं। पेड़ लगाने, बचाने, गढडा खोदने तथा पेड़ को मेंटेन करने का खर्चा सरकार देगी। सरकार किसानों की आमदनी के रास्ते निकाल रही है, इसका सभी को लाभ लेना चाहिए। डीएम ने कहा कि 24 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर सभी लोग एक-एक पेड़ ज़रूर लगाएं। कम से कम अपने दादा-दादी या नाना-नानी की याद में एक पेड़ जरूर लगाएं। यदि घर में चार सदस्य हैं तो चार पेड़ लगाए जाएं, पेड़ वन विभाग उपलब्ध कराएगा। गंगा किनारे वाले गांवों में पाॅलीथिन का भी प्रयोग वर्जित किया गया है। ग्रामीण बाजार से सामान लाने के लिए थैले का ही प्रयोग करें, पाॅलीथिन दुकानदार को वापस कर दें। डीएम ने कहा कि सरकार शिक्षा का स्तर पहले से बेहतर बनाने के लिए सरकारी स्कूलों में कांवेंट स्कूलों जैसी सुविधाएं मुहैया करा रही है, सर्दी के मौसम में स्वेटर, अच्छी यूनिफार्म, किताबे तथा मिड्डे मील के बावजूद भी कुछ अभिभावक अपने बच्चों से खेतों पर काम कराते रहते हैं और स्कूल नहीं जाने देते। उन्होंने कहा कि कम से कम अपने बच्चों को अंगूठाछाप मत बनाओं इनके हाथ में तो कलम आने दो। जो गरीब व्यक्ति अपने बच्चों का दाखिला अच्छे कांवेंट स्कूलों मंे कराना चाहते हैं तो निकट के कम्प्यूटर सेन्टर पर जाकर आॅनलाइन आवेदन करें। चयन प्रक्रिया के आधार पर चयनित होने पर कक्षा 8 तक का खर्चा सरकार उठाएगी। सदर विधायक महेश चन्द्र गुप्ता ने डीएम की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिलाधिकारी प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी के संदेश को जनता के बीच बहुत ही खूबी के साथ पहुँचा रहें हैं। जिलाधिकारी के आने के बाद जनपद में शिक्षा का स्तर पहले से कहीं बेहतर हो गया है। सरकार बिना भेदभाव के सभी धर्मांे, जातियों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचा रही है। गंगा की प्रति अपनी जिम्मेदारी समझकर उसे स्वच्छ बनाने का संकल्प लें, क्योंकि संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष हरीश शाक्य ने कहा कि यह खूबी है जिलाधिकारी की जो छुटटी का दिन होने के बावजूद कार्य में लगकर सरकार की मंशा को जनता के बीच पहुँचा रहे हैं। सभी ग्रामप्रधानों का दायित्व है कि वह गांव में शिक्षा का स्तर बेहतर बनाएं और स्वच्छ वातावरण बनाने के लिए शौचालय का प्रयोग करें व अन्य को भी प्रेरित करें, क्योंकि गांव यदि किसी क्षेत्र में अग्रणीय भूमिका निभाएगा तो इसका खिताब ग्राम प्रधान को ही जाएगा। अपर जिलाधिकारी प्रशासन अजय कुमार श्री वास्तव ने कहा कि शासन की मंशा है कि प्रत्येक गरीब को राशन मुहैया कराया जाए। इसके लिए टीमें गांवों में जाकर पात्रता सूची की जांच करेंगी, जिसमें से सम्पन्न लोगों के नाम हटाकर पात्र लाभार्थियों के नामों सम्मिलित किया जाएगा। आगजनी की घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए ग्राम सचिव व प्रधान प्रत्येक पीडित परिवार को तुरंत कपड़े व खाद्यान की व्यवस्था करें तथा पांच हजार रुपए की धनराशि 24 घंटे में उपलब्ध कराएं। कोई भी व्यक्ति भूखमरी से नहीं मरना चाहिए। गरीब व्यक्ति के साथ खड़े हो जाएं और उसे रोटी, कपड़ा और आवास जैसी मूलभूत सुविधाए मुहैया कराई जाएं। अन्त में ब्लाक उझानी के ग्राम खजुरारा पुख्ता के ग्राम प्रधान तिलक सिंह को बाढ़ के प्रति अच्छी जानकारी होने पर डीएम ने उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व महेन्द्र सिंह, नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी सेवाराम चैधरी, निदेशक सामाजिक वानकी महेन्द्र प्रताप सिंह, बीएसए प्रेमचन्द्र यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एके जादौन, जिला उद्यान अधिकारी राम निवास वर्मा सहित अन्य अधिकारीगण व समस्त उपजिलाधिकारी मौजूद रहे।

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