विल्सी: वेद कथा के सातवें दिन सम्मानित किया गया संकल्पी जोड़ों को

बिल्सी: आर्य समाज गुधनी के तत्वाधान में चल रही वेदकथा में आज  गृहस्थ में कैसे रहना चाहिए यह बताया गया । उपस्थित पति-पत्नी जोड़ों को बिल्सी चेयरमैन अनुज वार्ष्णेय और बिसौली के सुप्रसिद्ध समाज सेवी सुभाष चंद्र अग्रवाल के द्वारा सम्मानित किया गया । वेद  कथाकार आचार्य संजीव रूप ने गृहस्थ आश्रम को सब आश्रमों का आधार बताते हुए कहा कि  विवाह एक संस्था है पति और पत्नी को विवाह रूपी संस्था के नियमों का पालन करते हुए संस्था को मजबूत करना चाहिए । पति और पत्नी को परस्पर समर्पित होकर के रहना चाहिए ।घुंघट ,पर्दा प्रथा गृहस्थ को कमजोर करती हैं , स्त्रियों को इन कुरीतियों – कुप्रथाओं को समाप्त कर पति के कंधे से कंधा मिलाकर के गृहस्थ को उठाना चाहिए ,और अपनी उन्नति के साथ-साथ समाज की उन्नति का भी सदा विचार करना चाहिए। ग्रहस्त का मुख्य उद्देश्य है “उत्तम संतान का निर्माण करना ” और इसके लिए पिता को सदाचारी और माता को पतिव्रता धार्मिक होना अनिवार्य है!  आज की कथा के मुख्य अतिथि   बिल्सी चेयरमैन अनुज वार्ष्णेय ने वेद की स्तुति की और उपस्थित पति-पत्नी जोड़ों को ओम की माला पहनाकर सम्मानित किया ।सुभाष चंद्र अग्रवाल ने कहा कि “हमेशा सुवह उठकर सबको नमस्तेजी, आपका दिन शुभ हो “कहना चाहिए ।

मास्टर भीकम सिंह जी ने भी अपने सुंदर विचार रखें ।इससे पूर्व श्रीमती प्रज्ञा आर्य प्रश्रयआर्य सत्यम आर्य महेन्द्र आर्य एवं आर्य संस्कारशाला की बेटियों ने भजन गाए सभा में साहब सिंह ,सुखबीर सिंह ,संतोष कुमारी, हरपाल सिंह जानकी प्रसाद आर्य ,उपदेश सिंह मनोज श्रीवास्तव, सूरजवती देवी, भानु प्रकाश सिंह ,बद्रीप्रसाद आर्य किशनपाल आर्य कविता आर्य आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे l
नईम अब्बासी की रिपोर्ट

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