बदायूँ: निःशुल्क मुकदमों की पैरवी की दिलाई जाएगी सहायता।

बदायूँ : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राकेश कुमार तिवारी ने अवगत कराया है कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार आम जनता को विधिक सेवाओं के विषय में अधिकाधिक जागरूक किये जाने हेतु विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया।
जनपद न्यायाधीष/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूँ के निर्देश पर जिला कारागार में बन्दियों के हितार्थ विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में सर्वप्रथम दुर्गेश कुमार एवं रतन कुमार, नामिका अधिवक्तागण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा सभी उपस्थित बन्दियों को बताया गया कि जिन बन्दियों के पास अपने-अपने मुकदमों में पैरवी करने हेतु अधिवक्ता नहीं है, वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बदायूँ को निःशुल्क अधिवक्ता हेतु प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क अधिवक्ता नियुक्त कर विचाराधीन बन्दियों को विधिक सहायता दिलायी जाएगी।
के0पी0 त्रिपाठी, जेल अधीक्षक, जिला कारागार के द्वारा सभी उपस्थित बन्दियों को बताया कि जिन बन्दियों की जमानतें हो चुकीं हैं, परन्तु जमानती न मिलने के कारण वे अभी तक जेल से रिहा नहीं हो सके हैं। ऐसे सभी बन्दी भी विधिक सहायता हेतु आवेदन जिला कारागार बदायूँ को उपलब्ध करा सकते हैं तथा उनके द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र पर नियमानुसार विधिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी। तथा उनके द्वारा यह कहा गया कि सभी बन्दीगण जेल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर भाग लें, जिससे समय की सदुपयोगिता होगी तथा तनाव से मुक्ति मिलेगी। सचिव द्वारा शिविर में उपस्थित बन्दीगण को बताया गया कि उन्हें अपने विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिये और अपने विरूद्ध लगे आरोपित मामलों की सही ढंग से वकील की नियुक्ति कर पैरवी करानी चाहिए। यदि किसी बन्दीगण के मामले में पैरवी नहीं हो रही है, तो उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से निःशुल्क अधिवक्ता दिलवाया जायेगा। कारागार एक सुधारगृह की भांति होता है जहां से वे अच्छी बातें सीखकर अच्छे नागरिक बनें और रिहा होकर समाज में सम्मानपूर्वक जीवन यापन करें तथा जेल में जो भी कौषल विकास के कार्यक्रम चल रहे हैं उनमें प्रतिभाग कर अपने अन्दर कोई न कोई हुनर पैदा करें जिससे कि रिहा होने पर वे अपना जीवन-यापन अच्छे तरीके से कर सकें। सचिव द्वारा सभी बन्दियों को अन्त में बताया गया कि वह जेल के नियमों का पालन करें तथा अनुशासन बनायें रखें।

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