कोरिया: कोयला परिवहन ट्रको से उड़ने वाले धुल डस्ट के कारण बड़ा बाजार कौशल विकास केंद्र सहित शासकीय उच्चतर बालक माध्यमिक विद्यालय के छात्र परेशान। (वेदप्रकाश तिवारी की रिपोर्ट)

कोरिया/चिरमिरी। कोयला परिवहन ट्रको से उड़ने वाले धुल डस्ट के कारण बड़ा बाजार कौशल विकास केंद्र सहित शासकीय उच्चतर बालक माध्यमिक विद्यालय के छात्र परेशान है। लेकिन ओसीपी प्रबंधन के द्वारा ट्रक निकलने वाले मार्गो पर पानी का छिड़काव नही किया जा रहा है। डस्ट की मोटी परत बड़ा बाजार सोनावनी की कच्ची सड़क पर जम गई है। जिससे बड़ा बाजार वासी सहित सोनावनी के लोग परेशान है।
डस्ट के कारण चिरमिरिवासियों को दमा, स्वास, छाती से संबंधित गंभीर बीमारियों से धीरे धीरे लोग ग्रस्ति हो रहें है। यदि प्रबंधन रोड सेल के माध्यम को छोड़कर कोयला का परिवहन रेल यातायात से करेगा, तो ओसीपी चिरमिरी का कोयला सीधे हल्दीबाड़ी सीएचपी में डंप किया जा सकता है। जहां से लोगों को धुल डस्ट से होने वाली परेशानी से बचाया जा सकता है। तथा प्रबंधन को रोड सेल के माध्यम से कोयला बिक्री करने पर मोटा कमीशन सहित ट्रांसपोर्टरो से भी अच्छी खासी मोटी कमाई होती है। इसलिए प्रबंधन रेल यातायात नेटवर्क को समाप्त करने के लिए कोयला की जगह मिट्टी ज्यादा भेजने के चलते पावर प्लांट रेल से कोयला न मंगाकर ट्रको के माध्यम से कोयला मंगाना पड़ता हैं। यदि ईमानदारी से जिस प्रकार कोयला ट्रको मंे प्रबंधन के द्वारा छांटकर भरा जाता हैं, यदि उसी प्रकार से कोयला रेल के माध्यम से प्रबंधन कोयला भेजता, ऐसी स्थितियां ही निर्मित नही होती।
ज्ञात हो कि रोड सेल से सड़के तो खराब हो ही रही है, दूसरी ओर सड़क दुर्घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। कोयले की उड़ती धूल से पैदल व वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परियोजना से पावर प्लांटो और कारखानो के लिए सड़क मार्ग से कोयला परिवहन में लगे सैकड़ों डंपरों से प्रतिदिन मुख्य मार्ग पर कोयला गिरता है। दिन-रात परिवहन में लगे अधिकांश डंपर व ट्रेलर जर्जर हो गए है। जहां से ट्रके कोयला लेकर गुजरती है वहां के इलाकों में स्वास्थ्य को लेकर आपात स्थिति बन जाती है। सड़को पर गिरने वाले कोयले के टुकड़ो का वाहनो के पहिए से बनने वाले कोल डस्ट पूरे क्षेत्र को प्रदूषित करते है। वाहनों से गिरे कोयले से उड़ने वाली धुल सड़क से गुजरने वालों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। लेकिन इन प्रदूषणों से राहत दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहें है। बीते दो सालों में एकाएक कोयला लदान कम हो जाने से रेलवे भी अपनी आय को लेकर चिंतित है। क्योंकि कोयला अधिकारियों की काले कारोबार के चलते गुजरात व राजस्थान में स्थित पावर प्लांट ने यहां से कोयला की मांग कम कर दी। क्योंकि उनके कोयला रेक मंे कोल पत्थरों को हैवी हैवी मशीनों से पीसकर कोयला में मिलाकर भेजा जाता था, इसलिए उनके द्वारा कई बार कोयला की रेको को वापस भी किया गया। इनके न सुधरने के कारण कुछ प्रदेशो के पावर प्लांटो के द्वारा चिरमिरी से कोयला मंगाना ही लगभग बंद कर दिया।

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