बिल्सी : पिंडौल में हुआ लंका दहन,विभीषण से मित्रता ।

बदायूँ/बिल्सी : तहसील क्षेत्र के गांव पिंडोल चल रही रामलीला में बीती सोमवार की रात श्री बृज धाम आदर्श राम नाटक कला मंडल नौझील मथुरा के कलाकारों द्वारा लंका दहन एवं विभीषण मित्रता की लीला का रोचक मंचन किया गया। यहां सबसे पहले हनुमान जी ने छोटा सा रूप बनाकर लंका में प्रवेश किया और सीता की खोज करने लगे। तभी देखा एक द्वार पर राम-राम लिखा। उन्होंने समझा कि यहां कोई राम का भक्त रहता है और उन्होंने ब्राह्मण का रुप बनाकर द्वार पर आवाज दी भीषण जी ने द्वार पर ब्राह्मण को देखा और कहा कि हे ब्राह्मण आप कौन हैं आप अपना परिचय दीजिए हनुमान जी ने कहा मैं प्रभु राम का सेवक हूं और सीता का पता लगाने यहां आया हूं। विभीषण ने कहा कि मैं रावण का छोटा भाई विभीषण हूं और प्रभु राम का भक्त हूं। हनुमान जी ने कहा कि आप इस राक्षस नगरी में किस प्रकार से अपना जीवन यापन करते हैं। थोड़ी दूर पर अशोक वाटिका में उसमें सीता के दर्शन किए। हनुमान जी सीता के सामने मुद्रिका डाल दी। सीता मुद्रिका को पहचान कर बहुत विलाप करने लगती हैं तब हनुमान जी सीता के सामने प्रकट होते हैं और कहते हैं कि हे माता मैं राम का सेवक हूं और यह मुद्रिका में ही लाया हूं सीता को फि रभी विश्वास नहीं होता है तो हनुमान जी अपना बहुत बड़ा आकार करके अप ने रूप को दिखाते हैं। यहां हनुमान जी  फल तोड़ते हुए पकड़ लिया जाता है। मेघनाथ हनुमान जी को रावण के सामने लाकर पेश कर देता है तब रावण हनुमान जी को मारने का आदेश देता है उसी समय विभीषण आ जाते हैं और विभीषण राय देते हैं कि दूध को मारना उचित नहीं है इसे दंड देना चाहिए। इसकी पूंछ में आग लगा दीजिए। उनकी पूंछ में आग लगा देते हैं। हनुमान जी एक महल से दूसरे महल उछल कूद करने लगते हैं और पूरी लंका को जला देते है। चंद्रचूड़ लेकर हनुमान जी राम के पास लौट आते है। इधर विभीषण को लात मारकर रावण लंका से निकाल देता है विभीषण राम की शरण में आ जाता है। राम रामेश्वर की स्थापना करके समंदर से विनती करते हैं। इसके बाद नल-नील नाम के दो बंदर द्वारा समुद्र पर सेतु का निर्माण शुरु होता है। तब राम ने अंगद को रावण के दरबार में भेजा। सभी योद्धाओं ने अंगद का पैर को उठाया लेकिन वह तनिक भी नहीं हिला सका और अंगद राम दल में वापस आ जाते हैं।
नईम अब्बासी की रिपोर्ट

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