बदायूँ: सरकार अस्पताल पर आरोप/पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार।

बदायूं के नवादा चौकी क्षेत्र के अन्तर्गत प्राईवेट सरकार अस्पताल पर आरोप लगाते हुए पीड़ित ने पुलिस के उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई।

आप को बता दे बीते दिनों रियाज अहमद पुत्र मुईन उद्दीन अहमद निवासी दरगाह कालोनी सागर ताल नवादा थाना सिविल लाइन ने पुलिस के उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर आरोप लगाया कि पिछली 23 तारीख को वह अपने भाई रईस अहमद को बीमार होने पर सरकार अस्पताल ले कर गया, जहां उसने अपने भाई को भर्ती कराया।
आरोप है, कि उपचार के दौरान 4-5 डॉक्टर ने गलत इंजेक्शन लगा दिए। हालात खराब होने पर बरेली ले जाने के लिए डॉक्टर साहब कहने लगे,पीड़ित का यह भी आरोप है, कि उपचार के लिए पहले ही पचास हजार रुपये जमा करा लिए।इसी दौरान पीड़ित के भाई की मौत हो गई, पत्र के माध्यम से उसका आरोप है, कि उसके भाई की मौत, गलत इंजेक्शन और डॉक्टर की लापरवाही के चलते ही हो गई थी
पीड़ित का आरोप है, कि उसने व उसके परिवार के सदस्य ने सरकार अस्पताल में किसी प्रकार की कोई तोड़-फोड़ नही की गई और अस्पताल की तरफ से प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है,अस्पताल की तरफ से मेरे खिलाफ साजिश के तहत मुझपर कारवाई कराई गई है,और अस्पताल प्रबंधक से मुझे जान-माल का खतरा है, क्योंकि मेरे खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज करायी गई है, पीडि़त ने भेजे गए पत्र के माध्यम से बताया है कि बदले की भावना से मेरे खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज को निरस्त कराने की गुहार लगाते हुए, सुरक्षा की मांग की है, बहरहाल जो भी हो यह तो जांचके बाद ही साफ होगा फिलहाल पीड़ित ने पुलिस के उच्च अधिकारियों को भेजे गए पत्रों के माध्यम से अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए है,और पूरा मामला साजिशन बताते हुए कहा है कि, जब भाई की मौत के बाद पीड़ित और उसका परिवार खुद दुखी था,तो ऐसे में मेरे व मेरे परिवार ने अस्पताल में कोई तोड़ फोड़ नही गई।

मामला जो भी हो लेकिन बड़ा सवाल यह है कि, पीडि़त परिवार आरोप लगा रहा है कि उसके भाई की मौत उपचार के दौरान गलत इंजेक्शन और डाक्टर साहब की लापरवाही के चलते हूई है, अस्पताल प्रबंधक अस्पताल में तोड़फोड़ का मामला दर्ज करा चुका है, तो वही एसीएमओ साहब दिपावली के बाद जांच की बात कह रहे है,वही मामले में पुलिस की कार्रवाई की बात कह रहे है, बहरहाल सच की जांच के बाद कार्रवाई हो जानी चाहिए दोषी कौन यह तो निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ होगा
बैसे पीडि़त परिवार की महिला अपने वर्जन में यह कहती नजर आ रही है कि,उसने डाक्टर साहब से कहा कि मेरे पति ने कुछ नही खाया है, ऐसे में इंजेक्शन मत लगाइए अगर पीडि़ता की बात सही है तो डाक्टर को उसकी बात मान लेने चाहिए थी,जिससे अनहोनी बच जाती।
देखने वाली बात यह होगी कि अब इस मामले में दोषी कौन होगा और किस पक्ष पर कार्रवाई की जाएगी।

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