बदायूँ: ज़ीलॉट पब्लिक स्कूल ने चलाया खसरा और रूबेला जैसी संक्रमित बीमारियों के बचाव में जागरूकता अभियान

बदायूँ:- जीलॉट पब्लिक स्कूल बदायूँ में आज मंगलवार को खसरा और रूबेला जैसी संक्रमित बीमारियों के बचाव और टीकाकरण के बारे में बच्चों के माता-पिता के साथ एक गोष्ठी की जिसमें सी. एच. सी. जगत से आये डॉ. वीरेन्द्र कुमार सिंह,ने खसरा और रूबेला जैसी बीमारियों के बारे में विस्तार से बताया । अभिभावकों को उनके बच्चों को इस टीके को लगवाने के लिए प्रेरित किया और उनसे होने वाले फायदे के वारे में विस्तार से वताया ।

खसरा रोग क्या है तथा यह कैसे फैलता है ?
खसरा एक जानलेवा रोग है जो वायरस के संक्रमण से फैलता है । खसरा रोग के कारण बच्चों में शारीरिक या मानसिक विकलांगता का खतरा रहता है या उसकी असमय मृत्यु भी हो सकती है ।

खसरा व रूबेला के लक्षण क्या है ?
खसरा रूबेला एक बेहद संक्रमित रोग है यह इससे प्रभावित व्यक्तियों के खांसने या छीकने से फैलता है । सामान्य तौर पर खसरे के लक्षण चेहरे तथा शरीर पर गुलाबी दाने या चकत्ते, अत्यधिक बुखार, खांसी, जुखाम या आंखों का लाल हो जाना आदि होता है ।

खसरा रूबेला (एमआर) का टीकाकरण किन किन बीमारियों से रक्षा प्रदान करता है ?
खसरा रूबेला (एमआर) का टीकाकरण खसरा और रूबेला बीमारी से रक्षा प्रदान करता है, इसके साथ ही यदि गर्भवती महिलाओं को रूबेला के प्रति प्रति रक्षित किया जा चुका है तो नवजात शिशु में भी कनजेनिटल रूबैल्ला (सी आर एस) के प्रति सुरक्षित रहेंगे। यह टीका यदि बच्चे को पूर्व में लग चुका है तो भी इसे दोबारा लगवाने से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता ।

निदेशक अनिल बाबू ने बच्चों के माता-पिता को बताया कि यह टीकाकरण अभियान प्रदेश की सरकार द्वारा डब्ल्यूएचओ के सहयोग से सुनियोजित तरीके से पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है । यह टीका 9 माह के बच्चे से लेकर 15 वर्ष लगभग आयु के बच्चों को लगाया जा सकता है । इस टीके का कोई साइड इफेक्ट नहीं है और ना ही कोई परहेज है । पूर्व में 22 राज्यों में इस टीकाकरण का सफल प्रयोग किया जा चुका है।

निदेशक अनिल बाबू ने सभी बच्चों के माता-पिता से अनुरोध किया कि वे 11 दिसंबर को बच्चे को विद्यालय अवश्य भेजें । जिससे आप अपने बच्चे को भविष्य में होने वाले खसरा और रूबेला वायरस के संक्रमण से बचाया जा सके। अभिभावकों की और से पूछे गए प्रश्नों के वारे में विद्यालय में उपस्थित सी. एच. सी. जगत से आये डॉ. वीरेन्द्र कुमार सिंह, यूनीसेफ के मूसाझाग तथा (WHO) की तरफ से अमर सिंह ने उत्तर देकर उनकी भ्रांतियों को समाप्त किया।

उन्होने अभिभावकों को बताया कि नौ माह से लेकर 15 बर्ष तक के बच्चो को ही यह टीका लगाया जायेगा जिससे रूबेला बीमारी के लक्षण जैसे खारिज, मिचली, कान के पीछे गर्दन पर सूजन, बुखार, मुह पर गुलाबी दाने आदि से बचा जा सके।

अभिभावकों में सुधा राठौर, संदीप त्रिवेदी, बबिता राठौर, श्रीराम गुप्ता, शांति देवी, कुलदीप, प्यारेमियां, सत्यपाल, दिनेश कुमार, भावना सिंह, तहजीबुल हसन, दिनेश मिश्रा आदि उपस्थित रहे । अनिल बाबू ने सभी अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए बच्चों को सरकार द्वारा चलाये जा रहे अभियान के अन्तर्गत रूबेला मिजिल्स (काजेनायटल रुबेला सिंड्रोम) बीमारियों को वर्ष 2020 तक एलिमिनेट करने का लक्ष्य की शत प्रतिशत सफलता प्राप्त किये जाने का संकल्प लेने का आह्वान किया| इस अवसर पर स्कूल स्टाफ में उदय प्रताप सिंह, शिल्पी कुदेशिया, अमरीश कुमार आदि उपस्थित रहे|

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