उझानी: भगवान श्रीराम और भरत ने संपत्ति का नहीं, विपत्ति का बंटवारा किया।

उझानी: मेरे राम कथा समिति की ओर से नगर के समीमवर्ती गांव तेहरा स्थित शिव मंदिर प्रांगण में चल रही सेवा और संस्कारों को समर्पित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन अत्रि अनुसूइया मिलन, शबरी मिलन, माता सीता की अग्नि प्रवेश, दंडक वन लीला, जटायु-रावण युद्ध, जटायु मिलन, जटायु का उद्धार, खर-दूषण वध, मारीच वध, नवधा भक्ति, नारद संवाद, पम्पा सरोवर प्रस्थान आदि प्रसंगों का श्रवण कराया। अयोध्या विद्यापीठ स्कूल के सैकड़ों बच्चों और श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम का पूजन कर भव्य आरती की।
कथावाचक महाराज रवि समदर्शी ने कहा भगवान श्रीराम और भरत ने संपत्ति का नहीं, विपत्ति का बंटवारा किया। भरत और केवट जैसा त्याग देखने को नहीं मिल रहा। सच्चा ज्ञानी ही समाज को प्रकाशित कर सकता है। समाज में पीढ़ित लोगों के दुःख-दर्द को बांटे और उनके जीवन को खुशहाल बनाएं। समाज में फैली बुराईयों को दूर करें।
भगवान श्रीराम के न्यायपूर्ण शासनकाल को रामराज्य कहा गया। रामाज्ञा का किसी ने उल्लंघन नहीं किया। प्रजा सुखी और समुन्नत थी।
उन्होंने कहा शबरी प्रभु श्रीराम की अनन्य भक्त थी। कालांतर में अपने पति के कुसंस्कारों और अत्याचारों से तंग आकर शबरी ने ऋषि मातंग के आश्रम में शरण ली। ऋषि की सेवा सुश्रुषा और प्रभु श्रीराम का भजन समय व्यतीत करने लगी। शबरी की भक्ति को देखकर श्रीराम ने दर्शन दिए और झूठे फल खाकर उसका उद्धार किया। मनुष्य का जन्म पाकर किसी से भेदभाव नहीं करना चाहिए।
इस मौके पर विमल शाक्य, जबर सिंह यादव, अजयपाल सिंह यादव, विनय सैनी, सतीश यादव, अनूप कुमार, राजेश, सुनील यादव, धर्मदेव, सत्यवीर, रामाशीष, पोषाकी यादव, हरिओम, शैलेंद्र यादव, ओमवीर आदि मौजूद रहे।

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