बदायूँ:  सुपरवाइजरों एवं आशाओं का लिया जाए टेस्टः डीएम 

बदायूँः सुपरवाइजर आशा  एवं  आंगनबाड़ी कार्यकत्री महिला सशक्तिकरण एवं मीजल्स रूबेला टीकाकरण में युद्ध स्तर पर सहयोग करके अभियान को सफल बनाएं। गांव के कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर लाल श्रेणी के बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराए। डीपीओ सुपरवाइजरों, आंगनबाड़ी एवं आशाओं का टेस्ट लिया जाए जिससे गांव में महिलाओं को सही तरीके से जानकारी दे सकें।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत जिला स्तरीय पोषण समिति की बैठक आयोजित की गई। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी पीके दास को निर्देश दिए कि प्रश्न पत्र बनाकर सुपरवाइजरों, आंगनबाड़ी तथा आशाओं का टेस्ट लिया जाए कि गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी होने से पहले एवं बाद में कौन-कौन इंजेक्शन कब लगते हैं तथा क्या क्या उनको सुविधाएं दी जाती है। समस्त सुपरवाइजर गांव गांव जाकर पिछले एक वर्ष में हुई महिलाओं की डिलीवरी का आंकड़ा कब और कहां किसके कहने पर हुई है इसकी जानकारी तैयार कर उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि शासन की विशेष प्राथमिकता वाले चलाए जा रहे मिजिल्स रूबेला टीकाकरण एवं नारी सशक्तिकरण में घर घर जाकर कार्यक्रम को सफल बनाएं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण गांव के ग्राम प्रधानों, अध्यापकों तथा आदि गणमान्य लोगों के द्वारा ही कराया जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए नाप, तौल की मशीन सहित अन्य आवश्क यंत्र उपलब्ध रहे। राज्य पोषण मिशन के कार्यक्रमों को प्रमुखता के साथ संचालित करते हुए कुपोषित बच्चों को पुष्ट बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि सरकार की  मंशा है कि सभी गॉव कुपोषण मुक्त  जल्द से जल्द हो। गॉवों में 6 माह से 5 वर्ष तक का कोई भी बच्चा लाल श्रेणी में न हो और सभी को मानको के अनुसार पुष्टाहार का वितरण किया जाए। पोषण पुर्नवास केंद्र पर लाल श्रेणी के बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाया जा सकें।

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