बदायूँ: काव्य-कलश’ द्वारा आयोजित अभिनन्दन समारोह में सम्मानित किये गये समाजसेवी, रात भर चले कवि सम्मेलन में श्रोताओं ने लिया कविताओं का आनंद।

बदायूँ:  विशुद्ध साहित्ययिक संस्था ‘काव्य-कलश’ के तत्वावधान में गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी बीती रात जनपद के वरिष्ठ कवि रहे स्व0 रामनाथ शर्मा ‘सुमन’ की स्मृति में कवि सम्मेलन एवं अभिनन्दन समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन में जहां नगर की विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य विभूतियों को स्व. रामनाथ शर्मा सुमन स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया वहीं सम्मान उपरान्त आयोजित कवि सम्मेलन में सुदूर नगरों से एवं नगर के सम्मानित कविगण काव्यपाठ द्वारा रात भर श्रोताओं को अपनी रचनाओं से मंत्रमुग्त कर दिया। इस अवसर पर स्व. रामनाथ शर्मा ‘सुमन’ द्वारा रचित एवं कवि महेश मित्र द्वारा सम्पादित कविता संग्रह ‘मेरे मुक्तक मेरे गीत’ का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि पूर्व विधायक श्री प्रेमस्वरुप पाठक वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. रामबहादुर व्यथित द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर एवं श्री रामनाथ शर्मा सुमन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि अर्जित करने वाले 08 विभूतियों में वरिष्ठ साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त शिक्षक श्री प्यारे सिंह यादव ‘शिशु’, शिक्षक रहे एवं ए. पी. एम. डिग्री कालिज, उझानी के सचिव श्री राम प्रकाश शर्मा, राधेलाल इण्टर कालेज के शिक्षक श्री सुरेन्द्र शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. सुरेश चन्द्र नौगरैया, महिला साहित्यकार डाॅ. ममता नौगरैया, श्री कृष्ण इण्टर कालिज के सेवानिवृत्त शिक्षक श्री बद्री नारायण वैश्य, शिक्षक एवं समाजसेवी श्री अजय कुमार मिश्रा, आध्यात्म के क्षेत्र में पण्डित कृष्ण बल्लभ महेरे को को माल्यार्पण कर, शाॅल उड़ाकर एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान उपरान्त काव्य संध्या का प्रारम्भ हुआ। विशाल गाफिल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। काव्य संध्या में चन्दौसी के कवि हिमांशु भारद्वाज ने कहा, पुरुषोत्तम होने की अपनी पीर नहीं कह पाएयें, सिय बिन जीवन कैसा है रधुवीर नहीं कह पायेंगे। मधुकर मिश्र ने कहा, लेखिनी से लिख गये अदभुत अनोखे से कथन, ऐसे थे अपने सुमन ऐसे थे अपने सुमन। डाॅ. अक्षत अशेष ने कहा, मूंह से चबा रहे हैं जो सत्ता के पान को, उनका ही पीकदान है इस देश की जनता, सचमुच बड़ी महान है इस देश की जनता। महेश मित्र ने कहा, सराहनीय कृतित्व का जिनका और रहा व्यक्तित्व विराट। कुलदीप अंगार ने कहा, भारत माता चीख रही अंगार लिखो अंगार लिखो। कुमार आशीष ने कहा, बोझ दिल पर कहां तक लिये घूमते, दर्द लिखते रहे, गीत गाते रहे। विशाल गाफिल ने कहा, फकत इक पेंशन थी जो निवाला देती रहती थी, बुढ़ापे के अंधेरे को उजाला देती रहती थी। पवन शंखधार ने कहा, जब से भारतीय संस्कृति गुमनाम हुई है, गली मोहल्ले में मुन्नी बदनाम हुई है। अध्यक्षता कर रहे डाॅ. रामबहादुर व्यथित ने कहा, अमन के फरिश्ते को न छेड़िये साहिब, हम जो नींद से उठ बैठे तो खैर नहीं हैै। भारत शर्मा राज ने कहा, सोती पलके चूम मेरा सर सहलाते थे बाबूजी बारह बाली आखिरी बस से घर आते थे बाबूजी। अजीत सुभाषित ने कहा, तुम्हारा फैसला है ये जिसे चाहो उसे पूजो, किसी की अंध भक्ति का समर्थन हम नहीं करते। अभिषेक अनंत ने कहा, न राजनीति से बचे भगवान भी यहां, अब जातियों में फंस गये हनुमान भी यहां। बिल्सी की बाल कवियत्री मुक्ति आंनद ने कहा, अब तक वक्त ने चलाया सबको अपने वक्त से, उसी वक्त को अपने वक्त से चलना अब हम सिखा देंगे। प्यारे सिंह यादव ने कहा, आजादी के लिए सूलियों पर जो झूल गये, जीेने मरने दोनों का अंदाज निराला था। शायर सुरेन्द्र नाज़ ने कहा, मिरी बस्ती का हर बच्चा जो लक्ष्मण राम हो जाये, तो फिर घर के बुजुर्गों को बड़ा आराम हो जाये। संजय मिश्र ने कहा, सुनो आसुरी वृत्ति वालों हम परशुराम के वंशज हैं, डर जाती थी काल भैरवी भी उनकी अनुभूति से। कामेश पाठक ने कहा, कोई अदालत दुनिया की है ले सकती अधिकार नहीं, श्रीराम जन्मभूमि का हमको बंटबारा स्वीकार नहीं। अन्त में कार्यक्रम संयोजक कमलकान्त शर्मा एवं काव्य कलश के अध्यक्ष राहुल चैबे ने सभी का आभार व्यक्त किया। सम्मान समारोह का संचालन डाॅ. अक्षत अशेष एवं काव्य संध्या का संचालन कुमार आशीष ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में संस्था के सचिव अनिल रस्तोगी, सुनील कान्त, संजीव शर्मा, जिला पंचायत सदस्य विराट दुबे, संजीव वर्मा, सांसद आवंला प्रतिनिधि जितेन्द्र कश्यप, गिरीश शुक्ला, सुमित मिश्र, नरेश चन्द्र शंखधार, पंकज शर्मा, रीतिश उपाध्याय, मोना शर्मा, संदीप मिश्रा, सन्तोष शर्मा, रामशंकर शर्मा, सुरेन्द्र उपाध्याय, अतुलानंद पाण्डेय, अजीत सरीन, सुभाष शर्मा, विजय पाण्डेय, आदि उपस्थित रहे।

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